विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। सामान्य गर्भावस्था में जहां शिशु करीब 39 से 40 सप्ताह में जन्म लेता है, वहीं समय से काफी पहले दुनिया में आने वाले नवजातों के लिए जिंदगी की पहली सांस से ही कड़ा संघर्ष शुरू हो जाता है। फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने, संक्रमण से लड़ने की क्षमता बेहद कम होने और अंगों के अपरिपक्व रहने के कारण ऐसे बच्चों को बचाना बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय श्रीनगर का बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड (NICU) ऐसे नाजुक नवजातों के लिए जीवन की एक मजबूत उम्मीद बनकर उभरा है।
700 ग्राम के नवजात ने दो महीने की जंग जीतकर पाया ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताबबेस अस्पताल के नीक्कू वार्ड में पिछले एक वर्ष के दौरान 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का सफल उपचार किया गया है। रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल की डिलीवरी महज 25 सप्ताह में हुई, और समय से 14-15 सप्ताह पहले जन्मे इस नवजात का वजन केवल 700 ग्राम था।अत्यंत नाजुक हालत में बेस अस्पताल के नीक्कू वार्ड में भर्ती इस शिशु का डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने दो महीने तक लगातार उपचार किया। सतत निगरानी, वेंटिलेटर सपोर्ट और पोषण प्रबंधन के बाद बच्चे की स्थिति सुधरी और वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया। बच्चे के स्वस्थ होने पर जब उसे डिस्चार्ज किया गया, तो डॉक्टरों ने उसे ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब देकर केक काटा और इस पल को यादगार बना दिया। भावुक परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि यहां उनके बच्चे को अपनों की तरह संभाला गया।
डॉ. कृतिका का शिशु: रुद्रप्रयाग के पीएचसी बसुकेदार में तैनात चिकित्सक डॉ. कृतिका की 27 सप्ताह में हुई प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद गंभीर स्थिति में लाए गए नवजात को बेस अस्पताल की टीम ने सफल उपचार के बाद नया जीवन दिया। बच्चे के पिता एवं डिप्टी कमांडेंट ऋषभ बिष्ट ने नीक्कू वार्ड की सेवाओं की सराहना की।
रुद्रप्रयाग से ही विनीता और ललिता (जुड़वां बच्चे) के प्री-मैच्योर मामलों में भी नीक्कू वार्ड के डॉक्टरों ने बेहतरीन कार्य करते हुए नवजातों को नया जीवन दिया।
निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, बेस अस्पताल में मिला संबलबाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा ने बताया कि अत्यंत प्री-मैच्योर नवजातों के इलाज पर निजी अस्पतालों में परिवारों को 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है, जबकि बेस चिकित्सालय में पात्र मरीजों को यह उपचार सरकारी व्यवस्था के तहत निःशुल्क मिल रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है।इस पूरी सफलता में विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा के नेतृत्व में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अजय गोस्वामी, पीजी डॉक्टरों की टीम (डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. दानिश, डॉ. जाहिद, डॉ. अंजलि, डॉ. आशीष) तथा नीक्कू वार्ड इंचार्ज विजय फोनिया और नर्सिंग स्टाफ (साहिबा, नेहा, सुमन, श्वेता, पंकज, सोमती, मनीष, सानवी) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।सावधानी और विशेषज्ञ देखरेख है जरूरी
गायनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीप्ति शर्मा ने सलाह दी है कि समय से पहले प्रसव के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच, पौष्टिक आहार और पूरी सावधानी रखनी चाहिए। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सी.एम.एस. रावत ने पूरी बाल रोग और नीक्कू टीम को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्थान की प्राथमिकता हर मरीज को बेहतरीन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना है।