विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। व्यावसायिक संपत्तियों के नए स्वकर निर्धारण को लेकर व्यापारियों के सामने आ रही समस्याओं और भ्रांतियों को दूर करने के लिए नगर निगम श्रीनगर ने एक बड़ा और राहतभरा कदम उठाया है। महापौर आरती भंडारी ने व्यापारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए दिसंबर तक नए स्वकर की वसूली पर रोक लगाने की घोषणा की है। इस तय अवधि के दौरान निगम का कर अनुभाग व्यापारियों की समस्याओं, प्रारूप भरने में आ रही दिक्कतों और कर की दरों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए सीधे उनके प्रतिष्ठानों तक पहुंचेगा।
नगर निगम कार्यालय में महापौर आरती भंडारी की अध्यक्षता में व्यापार सभा श्रीनगर के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें व्यापारियों ने स्वकर का प्रारूप भरने में आ रही परेशानियों को रखा।
महापौर ने व्यापारियों की बात को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर जाकर फॉर्म भरवाने में मदद करें। उन्होंने स्वकर को न्यूनतम दरों पर रखने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। महापौर ने कहा, “व्यापारी समाज की रीढ़ हैं। श्रीनगर नगर निगम ने बोर्ड में प्रदेश की सबसे कम स्वकर दरें पारित की हैं, और हमारी कोशिश है कि यहां के व्यापारियों पर अन्य बड़े शहरों की तरह कर का अतिरिक्त बोझ न पड़े।”
वसूली स्थगित: जब तक व्यापारियों की सभी भ्रांतियों और समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक नए स्वकर की वसूली नहीं की जाएगी।
डोर-टू-डोर सहायता: निगम का कर अनुभाग व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर फॉर्म भरने में पूरी मदद करेगा। कर निरीक्षक नवीन कुमार ने बताया कि क्षेत्र में अभी तक लगभग 1300 नए स्वकर के प्रारूप वितरित किए जा चुके हैं।
शासन स्तर पर वार्ता: महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापारियों को अधिक से अधिक राहत दिलाने के लिए वह इस विषय को लेकर शहरी विकास विभाग एवं उत्तराखंड सरकार के स्तर पर भी वार्ता करेंगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान नगर आयुक्त नुपुर वर्मा, व्यापार सभा श्रीनगर के महासचिव छवि अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पंकज नेगी, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी, केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के प्रतिनिधि बृजेश भट्ट, नगर निगम पार्षद देवेंद्र मणि मिश्रा, प्रवेश चमोली, शुभम प्रभाकर, कर अधीक्षक अजहर अली, कर अधीक्षक सुशील कुमार कुरील, कर निरीक्षक नवीन कुमार सहित व्यापार सभा के तमाम प्रतिनिधि और निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
महापौर के इस जनपक्षीय निर्णय से श्रीनगर के व्यापारी वर्ग ने राहत की सांस ली है और इसे संवाद के जरिए समस्या समाधान की एक बेहतरीन पहल बताया है।