सत्य की गूंज, ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम में 13 साल पहले खेल कोटे के आधार पर हुई एक नियुक्ति अंततः विभागीय जांच के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अभियंता (EE) अशोक कुमार प्रजापति की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि नियुक्ति के लिए प्रस्तुत किए गए खेल प्रमाणपत्र शासन के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे, जिसके कारण पूरी नियुक्ति को ही अवैध घोषित कर दिया गया है।
वर्ष 2025 की शिकायत के बाद खुली पोल
इस पूरे मामले का खुलासा वर्ष 2025 में मिली एक शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2013-14 के दौरान खेल कोटे का अनुचित लाभ उठाकर उक्त अधिकारी ने नौकरी हासिल की थी। शासन के सख्त निर्देशों के बाद गठित जांच समिति ने जब फाइलों और रिकॉर्ड को खंगाला, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
क्यों अवैध मानी गई नियुक्ति?
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार: पात्रता का अभाव: नियुक्ति के समय जिस ‘यूनिवर्सिटी पावर लिफ्टिंग’ और ‘क्रॉस कंट्री’ प्रतियोगिता के प्रमाणपत्रों का उपयोग किया गया था, वे शासन द्वारा निर्धारित खेल उपलब्धियों की पात्रता सूची में शामिल ही नहीं थे।
मेरिट का असर: जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि यदि उस समय खेल कोटे का लाभ नहीं लिया जाता, तो सामान्य मेरिट के आधार पर संबंधित अधिकारी का चयन तकनीकी रूप से संभव नहीं था।
सुनवाई का मौका, फिर भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
पेयजल निगम प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए संबंधित अधिशासी अभियंता को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने के कई अवसर दिए। उन्होंने अपने स्तर से दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, लेकिन जांच समिति उनके तर्कों और दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं हुई।
प्रबंध निदेशक के आदेश पर सेवा समाप्ति
जांच समिति की रिपोर्ट और ठोस निष्कर्षों के आधार पर पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाते हुए नियुक्ति को नियमों के विपरीत करार दिया। इसके बाद अधिशासी अभियंता की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।यह कार्रवाई सरकारी विभागों में खेल कोटे और अन्य आरक्षित श्रेणियों के तहत होने वाली नियुक्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।