सत्य की गूंज
हरिद्वार(ब्यूरो) । अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय सभागार में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों ने पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने, अपराधों की रोकथाम और सामाजिक समरसता बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एससी-एसटी एक्ट के कुल 13 प्रकरण प्राप्त हुए हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से 10 पीड़ितों को आर्थिक सहायता का भुगतान किया जा चुका है। वहीं, शेष बचे मामलों के लिए समाज कल्याण निदेशालय, हल्द्वानी से बजट की मांग की गई है, जिसे बजट उपलब्ध होते ही तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने पीड़ितों को बिना किसी देरी के मदद पहुंचाने के लिए पुलिस विभाग को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:
दस्तावेजों की समय पर उपलब्धता: पुलिस विभाग एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हर मुकदमे में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के साथ पीड़ित का आधार कार्ड [नोट: केवल दस्तावेज का नाम], जाति प्रमाण पत्र और बैंक खाते का विवरण समय से समाज कल्याण विभाग को सौंपे, ताकि शासन की गाइडलाइन के अनुसार तुरंत भुगतान हो सके।
संयुक्त जागरूकता शिविर: जिन क्षेत्रों में इस प्रकार के अपराधों की दर अधिक है, वहां पुलिस और समाज कल्याण विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाएं।
कार्रवाई में ढिलाई पर रोक: झबरेड़ा विधायक वीरेंद्र जाति ने चिंता जताई कि कई बार पीड़ितों की शिकायतों पर समुचित कार्रवाई नहीं होती और मामलों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी जाती है। इस पर एडीएम ने क्षेत्राधिकारी सदर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जागरूकता और समीक्षा: भगवानपुर विधायक ममता राकेश ने क्षेत्र में घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित जागरूकता शिविर लगाने तथा पुलिस की अपराध समीक्षा बैठकों में विधायकों व जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने का सुझाव दिया।
प्रक्रिया का सरलीकरण: समिति सदस्य अनूप कुमार ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए वर्ष 1985 के अभिलेखों के स्थान पर उत्तराखंड राज्य गठन के बाद के अभिलेखों को आधार बनाने का प्रस्ताव रखा।
खेल सुविधाएं और रोजगार: हरिद्वार विधायक के प्रतिनिधि श्यामल कुमार ने संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने, आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की समय-सीमा तय करने और अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम व स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार बढ़ाने के सुझाव दिए।
बैठक के समापन पर समिति के सभी सदस्यों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समय पर आर्थिक मदद पहुंचाने और समाज में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी विभागों के बीच आपसी तालमेल और समन्वित प्रयासों पर विशेष बल दिया।