विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। समाज में फैली रूढ़ियों को तोड़ते हुए टिहरी जिले के एक 82 वर्षीय बुजुर्ग ने अनुकरणीय मिसाल पेश की है। कीर्तिनगर ब्लॉक के कुलेड़ी थाती डागर निवासी कलम सिंह रावत ने मृत्युपरांत अपना पूरा शरीर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करने का संकल्प लिया है। बुधवार को उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर पहुंचकर विधिवत रूप से अपने देहदान का पंजीकरण कराया, जिसके बाद उन्हें कॉलेज प्रशासन द्वारा ‘देहदान परिचय पत्र’ सौंपा गया।मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने की सराहना, प्राचार्य ने नमन कियाकलम सिंह रावत की इस जागरूकता और सकारात्मक सोच की मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इस अवसर पर आयोजित एक सादे समारोह में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सी.एम.एस. रावत ने उनका स्वागत किया और उनके इस महासंकल्प के लिए उन्हें नमन किया।
प्राचार्य डॉ. रावत ने कहा कि, “कलम सिंह जी द्वारा लिया गया यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं और समाज के प्रति उनकी गहरी जिम्मेदारी का परिचायक है। देहदान वास्तव में महादान है। इससे एमबीबीएस और पैरामेडिकल के विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का बारीकी से अध्ययन करने में अमूल्य मदद मिलती है, जो भविष्य के कुशल चिकित्सक तैयार करने के लिए आवश्यक है।” उन्होंने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति ऐसी सोच के साथ आगे आता है, तो उसमें ईश्वर के स्वरूप की अनुभूति होती है
प्रिंसिपल डॉ. सीएमएस रावत ने बुजुर्ग के संकल्प को बताया समाज के लिए प्रेरणादायी पंजीकरण कराने पहुंचे 82 वर्षीय कलम सिंह रावत ने बताया कि उनके मन में काफी समय से यह विचार था कि उनका शरीर नश्वर है, लेकिन मृत्यु के बाद भी यदि वह किसी के काम आ सके तो यह उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होगी
उन्होंने इस संबंध में पंडित सत्यानंद डंगवाल से चर्चा की और परिवार के सभी सदस्यों की पूर्ण सहमति लेने के बाद बुधवार को मेडिकल कॉलेज में पंजीकर कराया। उनका उद्देश्य यही है कि जीवन के बाद भी उनका शरीर मानव सेवा और चिकित्सा शिक्षा के काम आ सके परिवार के सभी सदस्यों की सहमति लेने के बाद बुधवार को पंजीकरण कराने पहुंचे। बेहद सरल है देहदान की प्रक्रियाएनाटॉमी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल द्विवेदी, जिन्होंने पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कराई, ने कलम सिंह रावत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने समाज के अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि देहदान की प्रक्रिया बहुत सरल है। इसके लिए एनाटॉमी विभाग में केवल एक निर्धारित प्रपत्र भरना होता है और परिवार की सहमति लेनी होती है
देहदान की प्रक्रिया है बेहद सरल- डॉ द्विवेदी पंजीकरण के बाद विभाग की ओर से व्यक्ति को ‘देहदान परिचय पत्र’ प्रदान किया जाता है।
कलम सिंह रावत के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचे पंडित सत्यानंद डंगवाल ने भी इस पहल को समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समय-समय पर अंगदान और देहदान के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं, और ऐसे में 82 वर्षीय बुजुर्ग का यह कदम समाज में मानव सेवा की भावना को और मजबूत करेगा।