विजय बहुगुणा / सत्य की गूंज(ब्यूरो)
श्रीनगर गढ़वाल / नई दिल्ली। जहाँ ब्रह्मज्ञान से चेतना जागृत हो, प्रेम से हृदय आलोकित हो और सेवा जीवन का संकल्प बन जाए, वहीं संत समागम आत्मिक जागृति का ऐसा पावन उत्सव बनता है, जो मनुष्य को अपने भीतर झाँकने और परमात्मा से जुड़ने की प्रेरणा देता है। इसी दिव्य भाव और आध्यात्मिक चेतना को साकार करते हुए, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्टूबर, 2026 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु एकत्र होकर सत्संग, सेवा, प्रेम और भक्ति के इस दिव्य मिलन के सहभागी बनेंगे।
श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता के बीच समागम स्थल की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। संतों की निस्वार्थ सेवा, परिश्रम और समर्पण से एक सामान्य सा प्रतीत होने वाला मैदान अब एक भव्य आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप धारण कर चुका है। विशाल पंडालों में श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएँ की गई हैं। साथ ही, अत्याधुनिक एल.ई.डी. स्क्रीन स्थापित की जा रही हैं, ताकि परिसर के प्रत्येक कोने में बैठे श्रद्धालु प्रेरणादायक प्रवचनों, भावपूर्ण भजनों एवं आध्यात्मिक विचारों को सहजता से देख-सुन सकें।
समागम की भव्यता में श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी अनुपम कलात्मकता और भव्य स्वरूप के साथ यह द्वार समागम की आध्यात्मिक गरिमा को अभिव्यक्त करता है। यह केवल एक स्वागत संरचना नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, सृजनशीलता और सामूहिक श्रद्धा की साकार अभिव्यक्ति है, जो प्रत्येक आगंतुक का प्रेम और समभाव के साथ अभिनंदन कर रही है।
संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा एवं आशीर्वाद से समागम की व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही हैं। सुचारु संचालन, सहज आवागमन और श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे परिसर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
यह संत समागम केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान, भक्ति, समर्पण और आत्मिक जागृति का पावन संगम है, जहाँ श्रद्धालु विश्वबंधुत्व, सौहार्द और निस्वार्थ सेवा जैसे मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं।