विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । मां का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत समान माना जाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में बोतल से दूध पिलाने का एक गलत फैसला मासूम की जान पर बन आया। चमोली जनपद के जोशीमठ क्षेत्र का एक महीने का नवजात शिशु बोतल के दूध के संक्रमण के कारण मौत के मुंह में पहुंच गया था। जोशीमठ और गोपेश्वर अस्पतालों में सुधार न होने के बाद उसे अत्यंत नाजुक हालत में राजकीय हे.नं.ब. बेस चिकित्सालय श्रीनगर रेफर किया गया।
यहाँ बाल रोग विशेषज्ञों (पीडियाट्रिशियन) और नर्सिंग स्टाफ की 11 दिनों की कड़ी मेहनत और गहन उपचार के बाद मासूम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने माता-पिता के साथ घर लौट सका है।
बोतल के दूध से फैला गंभीर संक्रमण, किडनी-आंतों ने काम करना किया बंद
बाल रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक शर्मा ने मामले की गंभीरता को साझा करते हुए बताया कि जोशीमठ के कमद गांव निवासी संजय और गौरी देवी का एक माह का शिशु लगातार बीमार चल रहा था। मां के दूध की जगह बोतल से दूध देने के कारण बच्चे को भयंकर पेचिश और फूड इन्फेक्शन (संक्रमण) हो गया। लगातार दस्त से शरीर का पूरा पानी (severe dehydration) निचोड़ चुका था।
श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बच्चे की स्थिति यह हो गई थी:
अंगों की विफलता: अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण बच्चे की किडनी ने काम करना कम कर दिया था।
आंतें हुईं चोक: संक्रमण के कारण आंतों की कार्यप्रणाली पूरी तरह रुक गई थी और पेट फूल गया था।
मस्तिष्क पर असर: शरीर में आवश्यक लवणों (इलेक्ट्रोलाइट्स) की कमी के चलते दिमाग में सूजन आ गई थी और दिल व फेफड़ों की कार्यप्रणाली भी रुकने की कगार पर थी।
अस्पतालों के बेहतरीन ‘तालमेल’ से बची मासूम की जान
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में डॉक्टरों के आपसी समन्वय की बड़ी भूमिका रही। चिकित्सक डॉ. सर्वजीत कौर ने बताया कि गोपेश्वर अस्पताल की चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी ने समय रहते बच्चे की गंभीर स्थिति की जानकारी श्रीनगर बेस अस्पताल से साझा कर दी थी। इसके चलते बेस अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर टीम पहले से ही जीवन रक्षक उपकरणों के साथ तैयार खड़ी थी।
इस जटिल उपचार को सफल बनाने में डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. सर्वजीत कौर के साथ डॉ. मेहरा विरोथिया, डॉ. दानिश और नर्सिंग स्टाफ नेहा रावत, बीना, अनिल, धीरा पुंडीर व अनिता ने दिन-रात एक कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
याद रखें: मां के दूध का कोई विकल्प नहीं, बोतल है बीमारियों की जड़
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा ने समाज को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित, पौष्टिक और संपूर्ण आहार है, जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी कारणवश मां को दूध कम आ रहा हो, तो परिवार खुद डॉक्टर न बने और न ही सुनी-सुनाई बातों में आकर बच्चे के मुंह में बोतल का निप्पल डालें। ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लें, क्योंकि बोतल से होने वाला संक्रमण नवजात के लिए जानलेवा साबित होता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि वे क्लिनिकल इलाज के साथ-साथ ‘ब्रेस्टफीडिंग जागरूकता’ को लेकर एक सामाजिक मिशन पर भी काम कर रहे हैं।
भावुक हुए माता-पिता, डॉक्टरों को बताया ‘भगवान’
बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने पर पिता संजय और माता गौरी देवी की आंखें खुशी से छलक उठीं। उन्होंने बेस अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। माता-पिता ने कहा कि बच्चे की हालत देखकर वे पूरी उम्मीद खो चुके थे, लेकिन डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर उनके आंगन की खुशियां दोबारा लौटा दी हैं।
