अजय, सत्य की गूंज
देहरादून(ब्यूरो)। उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर साहस, शक्ति और संकल्प के एक वैश्विक महायज्ञ की गवाह बनने जा रही है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यू.टी.डी.बी.) के तत्वाधान में आगामी 23 मई, 2026 को राजधानी देहरादून में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह’ का भव्य काउंटडाउन रन आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक 10 किलोमीटर की दौड़ का ध्वजारोहण (Flag off) माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं मुख्यमंत्री आवास से करेंगे। यह काउंटडाउन रन उस महाअभियान की शुरुआत है, जो 31 मई को चमोली की नीति घाटी में उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी अल्ट्रा मैराथन के रूप में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचेगा।
मशाल प्रज्ज्वलन और आधिकारिक शुभंकर (Mascot) का अनावरण
23 मई का दिन केवल दौड़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन दो ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न होंगे:
भव्य मशाल (फ्लेम्बो) प्रज्ज्वलन: मुख्यमंत्री द्वारा उस पावन मशाल को प्रज्वलित किया जाएगा, जो हिमालय की 15,500 फीट ऊँची दुर्गम घाटियों तक धावकों को प्रेरित करेगी।
शुभंकर (Mascot) लॉन्च: 31 मई की मुख्य अल्ट्रा मैराथन के आधिकारिक शुभंकर का अनावरण होगा, जो हिमालय की अदम्य शक्ति और उत्तराखंड की वीरांगना संस्कृति का प्रतीक है।
⛰️ चमोली की नीति घाटी में दिखेगी असली चुनौतीदेहरादून का यह आयोजन उस स्वर्णिम अध्याय का प्रवेश द्वार है, जो वैश्विक मानचित्र पर उत्तराखंड का नाम दर्ज कराएगा। 31 मई 2026 को चमोली की नीति घाटी में 15,500 फीट (लगभग 4,725 मीटर) की अभूर्व ऊंचाई पर 75 किलोमीटर की ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ आयोजित होगी। इस आयोजन का लक्ष्य इसे विश्व की छठी सबसे बड़ी उच्च-ऊंचाई (High-Altitude) अल्ट्रा मैराथन के रूप में स्थापित करना है।
🌿 ‘वाइब्रेंट विलेज’ के संकल्प को मिलेगी नई उड़ानभारत-तिब्बत सीमा पर बसा अंतिम आबाद गाँव ‘नीति गाँव’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ का जीवंत प्रतीक है। इस सीमांत क्षेत्र को पर्यटन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने में यह खेल सप्ताह बड़ी भूमिका निभाएगा। ”23 मई को देहरादून की सड़कों पर जो मशाल जलेगी, वह केवल एक दौड़ का आरम्भ नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उस सपने की शुरुआत है जो नीति घाटी को विश्व के साहसिक धावकों का गंतव्य बनाएगी। प्रधानमंत्री जी के ‘वाइब्रेंट विलेज’ के स्वप्न को हम हिमालय की ऊँचाइयों पर साकार करने जा रहे हैं।”
