विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष सन्दर्भ में” का भव्य उद्घाटन गुरुवार को हुआ। इस अवसर पर देश के प्रख्यात शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर गंभीर वैचारिक मंथन किया।शिक्षा केवल ज्ञानार्जन नहीं, व्यक्तित्व का निर्माण है: प्रो. मुरली मनोहर पाठकमुख्य अतिथि, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 पूर्व की नीतियों की तुलना में अधिक समग्र और भारतीयता से ओत-प्रोत है। उन्होंने ‘मेधा’ और ‘विवेक’ पर जोर देते हुए कहा, “वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति को बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित करे। ज्ञान का सही समय और परिस्थिति के अनुसार उपयोग करना ही विवेक है। प्रो. श्री प्रकाश सिंहकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण और संवर्धन उच्च शिक्षा संस्थानों की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शोधार्थियों को निरंतर नवाचार और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में जोड़ने के लिए प्रेरित किया।व्यावहारिक और वैज्ञानिक है प्रो. राज शरण शाहीविशिष्ट अतिथि प्रो. राज शरण शाही ने अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक और तार्किक है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे भारतीय चिंतन मानवीय कल्याण की भावना से जुड़ा है।विशेष आकर्षण: ‘उत्तराखंड की रामलीला’ प्रदर्शनीसंगोष्ठी के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. पुनीता गुप्ता द्वारा ‘उत्तराखंड की रामलीला: एक दृश्य यात्रा’ विषय पर विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। ICSSR द्वारा वित्तपोषित इस प्रोजेक्ट में चित्रों के माध्यम से उत्तराखंड की रामलीला के इतिहास, मंचन शैली और इसमें महिलाओं की बढ़ती सहभागिता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रो. सुनीता गोदियाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को भविष्य की शिक्षा की दिशा बताया। विषय अवधारणा: संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि NEP-2020 भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने का एक महायज्ञ है। सम्मान का स्वागत अंगवस्त्र और तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया, जो पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बना।संचालन: डॉ. अनु राही ने सुव्यवस्थित ढंग से कार्यक्रम का संचालन किया।आभार: प्रो. अनिल कुमार नौटियाल ने सभी विद्वानों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षक, शोधार्थी और भारी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ हुआ।पोर्टल के लिए तकनीकी विवरण (Metadata):हेडलाइन: एचएनबीजीयू श्रीनगर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।