गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023' पर मुख्य अतिथि एसडीएम नूपुर वर्मा का स्वागत करतीं कार्यक्रम संयोजिका प्रो. सीमा धवन
विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिरला परिसर स्थित एसीएल हॉल में आज ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पर एक वृहद अकादमिक विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और लगभग 400 छात्र-छात्राओं ने शिरकत की और महिलाओं के राजनीतिक भविष्य एवं संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, श्रीनगर की एसडीएम श्रीमती नूपुर वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर सत्र का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार शैक्षिक और आर्थिक स्तर पर महिलाओं को मजबूत कर रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाएं मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से खुद को सशक्त बनाएं। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया।
विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एन. एस. पंवार ने कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं का नेतृत्व हमेशा प्रभावी रहा है, लेकिन विधायिकाओं में उनकी कमी खटकती थी। यह अधिनियम न केवल उनकी संख्या बढ़ाएगा, बल्कि लोकतंत्र को भी नई मजबूती देगा। वहीं, प्रो. एम. एस. पंवार ने पर्वतीय क्षेत्र की महिलाओं की विशिष्ट चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून उन्हें अपनी स्थानीय समस्याओं को सदन तक पहुँचाने का मौका देगा।
प्रो. एम. एम. सेमवाल (राजनीति विज्ञान): उन्होंने अधिनियम के प्रावधानों को समझाते हुए इसके त्वरित क्रियान्वयन की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव आएगा।
प्रो. मंजू प्रकाश गुसाईं: उन्होंने इसे समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया और कहा कि समाज के असंतुलन को दूर करने के लिए ऐसे विधेयकों की सख्त जरूरत है।
प्रो. सीमा धवन उन्होंने स्वागत भाषण में कहा कि इस तरह के मंच छात्रों को संवैधानिक मुद्दों पर जागरूक करने के लिए आवश्यक हैं।
इस विमर्श की सबसे खास बात यह रही कि इसमें मौजूद 400 प्रतिभागियों को पांच अलग-अलग समूहों में बांटा गया। इन समूहों ने अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। कुलपति का संदेश डॉ. अमरजीत सिंह परिहार द्वारा पढ़ा गया, जिसमें नीति-निर्माण में मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता की बात कही गई। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कविता भट्ट ने किया और अंत में प्रो. आर. एस. फर्त्याल ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।