विजय बहुगुणा / सत्य की गूंज ब्यूरो
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा “अनुसंधान पद्धति एवं शोधपरक लेखन: विधियाँ एवं व्यवहार” विषय पर पाँच दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम (Short-Term Course – STC) का भव्य शुभारंभ 29 अक्टूबर को किया गया। 29 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों तथा विभिन्न शैक्षणिक विषयों से जुड़े प्रतिभागियों की अनुसंधान क्षमता और अकादमिक लेखन कौशल को सुदृढ़ करना है।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थितिपारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस उद्घाटन समारोह में एनआईटी उत्तराखंड के कार्यवाहक निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर प्रो. बिनोद मिश्रा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।इस अवसर पर अधिष्ठाता (योजना एवं विकास) प्रो. विवेक श्रीवास्तव, अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं परामर्श) डॉ. धर्मेन्द्र त्रिपाठी, कुलसचिव हरि मौल आज़ाद, तथा संयोजक डॉ. जागृति सहारिया सहित संस्थान के तमाम संकाय सदस्य, विभागाध्यक्ष और देश भर से आए प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में संयोजक डॉ. रेणु भदोला डंगवाल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि समन्वयक डॉ. मीनाक्षी राणा ने पाठ्यक्रम के उद्देश्यों और रूपरेखा से सबको अवगत कराया।
सार्थक और नैतिक शोध पर विशेष जोरकार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए:प्रो. विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि शोध केवल उत्तर खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्थक प्रश्न पूछने और व्यवस्थित अन्वेषण की प्रक्रिया है।
डॉ. धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने अंतःविषयक शोध और विभिन्न विषयों के बीच विचारों के आदान-प्रदान के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
कुलसचिव हरि मौल आज़ाद ने शोध में मौलिकता, सत्यनिष्ठा, नैतिक मूल्यों और प्रभावी अकादमिक लेखन को प्रत्येक शोधार्थी के लिए आवश्यक बताया।देशभर से जुड़े हैं विषय विशेषज्ञ और शोधार्थीपाँच दिवसीय इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न एनआईटी, आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सरकारी संगठनों से प्रख्यात शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इन सत्रों में शोध समस्या की पहचान, अनुसंधान दृष्टिकोण का विकास, उपयुक्त पद्धतियों की समझ तथा प्रभावी अकादमिक लेखन जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों पर गहन चर्चा की जा रही है। यह पाठ्यक्रम मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और अभियांत्रिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों के शोधार्थियों को एक साझा अकादमिक मंच प्रदान कर रहा है।