सतपुली नगर पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र चौहान पर गिरी गाज, वित्तीय अनियमितताओं पर नोटिस जारी कर अधिकार सीज
विजय बहुगुणा /सत्य की गूंज (ब्यूरो)
सतपुली / पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी गढ़वाल के सतपुली नगर पंचायत में विभिन्न विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जाँच में प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमिताओं की पुष्टि होने के बाद, नगर पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह चौहान के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनके समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी गई है।
स्थानीय निवासी रविंद्र रावत व शशांक घिल्डियाल द्वारा की गई संयुक्त शिकायत के आधार पर हुई जाँच में अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह चौहान को निम्नलिखित मामलों में प्रथमदृष्टया उत्तरदायी माना गया है:
टैक्सी पार्किंग ध्वस्तीकरण: ₹3,71,852 की लागत से निर्मित टैक्सी पार्किंग को बिना किसी तकनीकी स्वीकृति और निविदा के ध्वस्त करना।
ठेके की दरों में मनमानी: पार्किंग ठेके की दर को ₹16,000 से घटाकर ₹8200 करना, जिससे निकाय को आर्थिक क्षति पहुँची।
अनाधिकृत भुगतान व आवंटन: महर्षि वाल्मीकि ट्रस्ट को बिना शासनादेश के ₹50,000 जारी करना, दुकानों का अवैध व नियम विरुद्ध आवंटन, तथा पूर्व बकाया वसूली के बिना पार्किंग का पुनः आवंटन।
मेले और अन्य कार्य: कुंज नयार घाटी मेले में टेंट-साउंड कार्य का कृत्रिम विखंडन कर लगभग ₹9.63 लाख की अनियमितता बरतना।
फंड का दुरुपयोग व अनियमित आहरण: वाहनों के किराये के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग, निकाय के वाहन के लिए स्वयं या स्वजनों के पेट्रोल पंप से भुगतान, तथा आवारा पशुओं/बंदरों के नाम पर ₹46,800 में से ₹38,400 का बिना बिल-वाउचर के सीधे अपने खाते में आहरण करना।
जांच में इन सभी कृत्यों को अधिप्राप्ति नियमावली 2017/2025, GFR-157 तथा शासन के नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया है।
23 अक्टूबर से अधिकारों पर रोक, 15 दिन का समय
उत्तराखंड में यथा-प्रवृत्त नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 (2) (क) व (ख) के अंतर्गत कार्यालय ज्ञाप जारी करते हुए दिनांक 23 अक्टूबर 2026 से अध्यक्ष के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं।
राज्यपाल की स्वीकृति के उपरांत जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल को अध्यक्ष के अधिकारों के निर्वहन हेतु प्राधिकृत किया गया है, जो डिप्टी कलेक्टर स्तर के राजपत्रित अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपेंगे। शासन द्वारा अध्यक्ष को अपना लिखित अभिकथन, साक्षी प्रस्तुत करने या व्यक्तिगत सुनवाई हेतु 15 दिन का समय दिया गया है, समयानुसार संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पद से हटाने की विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।