विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू अंतर्गत संचालित ढिकवालगांव पंपिंग योजना पिछले लगभग दो सप्ताह से पूरी तरह ठप पड़ी हुई है,जिसके चलते पूरे क्षेत्र में पेयजल संकट विकराल रूप धारण करता जा रहा है। भीषण गर्मी के इस दौर में हजारों ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं। गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित होने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है और विभागीय कार्यप्रणाली के प्रति ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार ढिकवालगांव पंपिंग योजना के बंद होने का सीधा असर खिर्सू क्षेत्र के अनेक गांवों पर पड़ा है। बुघाणी,देवलगढ़,जलेथा,बलोड़ी,सरणा,सुमाड़ी,ढिकवालगांव,धरीगांव,खालू,चमरोड़ा,भेसकोट,उज्ज्वलपुर,भटोली,मलेथा तथा चकवाली सहित अनेक गांवों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई गांवों में लोग दिनभर नलों में पानी आने का इंतजार करते रहते हैं,जबकि अनेक स्थानों पर नलों से एक बूंद पानी तक नहीं पहुंच रही। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा लगातार तकनीकी खराबी और मरम्मत कार्य का हवाला दिया जा रहा है,लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का आरोप है कि जल निगम एवं संबंधित विभाग योजना को सुचारु करने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद स्थायी समाधान न होना विभागीय कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। ग्रामीणों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि विभाग द्वारा लोगों से दो-दो योजनाओं के नाम पर नियमित रूप से बिल वसूले जा रहे हैं। एक ओर ढिकवालगांव पंपिंग योजना का अलग बिल लिया जा रहा है,वहीं दूसरी ओर ग्रामीण मूल स्रोत से मिलने वाले पानी का भी अलग बिल उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि भारी भरकम बिल चुकाने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि जब पंपिंग योजना बंद पड़ी है और मूल स्रोत से भी पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही,तो आखिर जनता किस सुविधा का भुगतान कर रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग जनता से नियमित राजस्व वसूलने में तो पूरी सक्रियता दिखा रहा है,लेकिन पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी कारणवश योजना बाधित थी तो विभाग को तत्काल वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस संबंध में जल निगम श्रीनगर के सहायक अभियंता अर्पित मित्तल तथा कनिष्ठ अभियंता कण्डारी को मोबाइल फोन एवं व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि ढिकवालगांव पंपिंग योजना की मशीन में बड़ा तकनीकी फॉल्ट आने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई है। विभागीय स्तर पर मरम्मत कार्य लगातार जारी है तथा आगामी दो से चार दिनों के भीतर योजना को पुनः सुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सहयोग एवं धैर्य बनाए रखने की अपील भी की। वहीं क्षेत्रवासियों में बुघाणी के पूर्व प्रधान प्रमोद उनियाल,देवलगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश कुमार फौजी तथा ताजबर कुमार सहित अनेक ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को इस प्रकार परेशान होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों के लिए बन चुकी है। गांवों में पानी न मिलने के कारण ग्रामीण दूरस्थ प्राकृतिक स्रोतों,नौलों और गधेरों से पानी ढोने को मजबूर हैं। कई महिलाओं को सुबह से शाम तक केवल पानी की व्यवस्था में जुटना पड़ रहा है। घरेलू कार्यों के साथ-साथ पशुओं के लिए पानी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट के कारण दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पेयजल जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधा को लेकर विभाग की उदासीनता अब असहनीय हो चुकी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो क्षेत्रीय जनता सड़कों पर उतरकर व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होगी,जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी पौड़ी उपजिलाधिकारी श्रीनगर,जल निगम तथा जल संस्थान के उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ढिकवालगांव पंपिंग योजना को शीघ्र सुचारु करने की मांग की है। लोगों ने कहा कि गर्मी के इस मौसम में पेयजल संकट लगातार भयावह होता जा रहा है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।