विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
कीर्तिखाल/लैंसडाउन(ब्यूरो) । देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में स्थित भैरवगढ़ी मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक शांति और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लैंसडाउन के समीप कीर्तिखाल गांव की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का बेजोड़ नमूना भी है।
कीर्तिखाल से मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को घने जंगलों के बीच से होकर लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर का पैदल ट्रैक करना पड़ता है। जैसे ही आप पहाड़ी की चोटी पर पहुँचते हैं, वहाँ से हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों का 360 डिग्री व्यू आपकी सारी थकान मिटा देता है। मानसून के दौरान यह मार्ग पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है, जो इसे और भी मनमोहक बनाता है।
गढ़वाल के रक्षक काल भैरव का निवास भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित यह मंदिर क्षेत्र के रक्षक और द्वारपाल के रूप में पूजनीय है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अनूठा प्रसाद भैरव देवता को काले रंग की वस्तुएं प्रिय हैं, इसलिए यहाँ मंडुवे (बाजरे) के आटे का विशेष प्रसाद चढ़ाया जाता है। प्राचीन इतिहास: ऐतिहासिक रूप से इस स्थान को लंगूर गढ़ के नाम से जाना जाता था, जो गढ़वाल के प्राचीन 52 गढ़ों में से एक महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक स्थल रहा है।
आध्यात्मिक शांति और एडवेंचर का अनूठा संगम होने के कारण भैरवगढ़ी मंदिर पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। यहाँ की ताजी हवा और हिमालयी चोटियों के अद्भुत दृश्य इसे एक परफेक्ट ‘वीकेंड डेस्टिनेशन’ बनाते हैं।