विजय बहुगुणा
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षभर हरे चारे की कमी से जूझ रहे दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों के लिए श्रीनगर आंचल दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड ने एक ऐतिहासिक और किसान हितैषी पहल की है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संघ ने अपने परिसर में एक एकड़ भूमि पर उच्च गुणवत्ता वाली ‘सुपर नैपीयर घास’ का सफल उत्पादन किया है। इस बेहतरीन पहल से न केवल पौड़ी जनपद बल्कि पूरे गढ़वाल मंडल के हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है।
15 जुलाई से शुरू होगा वितरण, मात्र 1 रुपये में मिलेगी कटिंग
दुग्ध संघ द्वारा आगामी 15 जुलाई से सुपर नैपीयर घास की लगभग पांच लाख (5,00,000) कटिंग किसानों, दुग्ध उत्पादक समितियों एवं दुग्ध संघों को मात्र एक रुपये प्रति कटिंग की अत्यंत रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम पर्वतीय क्षेत्रों में हरे चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी मील का पत्थर माना जा रहा है।
सुपर नैपीयर घास की विशेषताएं और लाभ:
कृषि एवं चारा विशेषज्ञों के अनुसार, सुपर नैपीयर घास पशुओं के लिए एक वरदान की तरह है:
- अत्यधिक पौष्टिक: यह घास प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
- तेजी से विकास: यह बहुत तेजी से बढ़ने वाली तथा बार-बार कटाई के योग्य चारा फसल है।
- दीर्घकालिक उत्पादन: एक बार रोपण के बाद लंबे समय तक इसका उत्पादन लिया जा सकता है, जिससे पशुपालकों को वर्षभर हरा चारा आसानी से उपलब्ध रहेगा।
- दुग्ध क्षमता में वृद्धि: इसके नियमित सेवन से दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि होगी, जिससे सीधे तौर पर पशुपालकों की आय बढ़ेगी।
योजना का बड़ा सामाजिक पक्ष: वन्यजीवों के खतरे से बचेगी मातृशक्ति
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों की माताओं और बहनों को अब हरे चारे के लिए घने जंगलों का रुख कम करना पड़ेगा। आज भी पहाड़ में अनेक महिलाएं प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर जंगलों में घास काटने जाती हैं, जहां उन्हें गुलदार और भालू जैसे हिंसक वन्यजीवों के बड़े खतरे का सामना करना पड़ता है।
यदि गांवों के आसपास ही खेतों और मेड़ों पर सुपर नैपीयर घास का उत्पादन बढ़ता है, तो महिलाओं की कठिन मेहनत कम होगी, उनका कीमती समय बचेगा और वन्यजीवों के हमलों से होने वाले जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा की दूरदर्शी सोच लाई रंग
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने में दुग्ध संघ के दूरदर्शी प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा की विशेष और सराहनीय भूमिका रही है। उनके निरंतर प्रयासों से किसानों की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस घास का उत्पादन शुरू किया गया है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण और पशुपालक इसका लाभ उठा सकें। संघ के इस प्रयास से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे।
पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
क्षेत्र के किसान एवं दुग्ध उत्पादक संघ की इस पहल की चौतरफा सराहना कर रहे हैं और इसे पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि इस मॉडल का व्यापक स्तर पर विस्तार किया गया, तो आने वाले वर्षों में गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।