विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) उत्तराखण्ड ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भाषाई संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है [cite: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित भारतीय भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु एनआईटी उत्तराखण्ड एवं PORAKSH Private Limited के मध्य समझौता ज्ञापन…
कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भाषाई संरक्षण के क्षेत्र में…]. संस्थान के प्रभारी निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला के कुशल नेतृत्व में आज, 22 जून को एनआईटी उत्तराखण्ड और PORAKSH Private Limited के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए [cite: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड के प्रभारी निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला के कुशल नेतृत्व में दिनांक 22 जून 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड एवं PORAKSH Private Limited के मध्य…
समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।].यह साझेदारी मुख्य रूप से AI आधारित भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा छात्रों के कौशल उन्नयन (Skill Development) को बढ़ावा देने के लिए की गई है.संस्थान की ओर से अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं परामर्श) डॉ. धर्मेन्द्र त्रिपाठी तथा कंपनी की ओर से संस्थापक एवं मुख्य रणनीतिक अधिकारी श्री जय आदित्य नौटियाल ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए
[cite: संस्थान की ओर से इस समझौता ज्ञापन पर डॉ. धर्मेन्द्र त्रिपाठी, अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं परामर्श), एनआईटी उत्तराखण्ड तथा कंपनी की ओर से श्री जय आदित्य नौटियाल, संस्थापक एवं मुख्य रणनीतिक अधिकारी, PORAKSH Private Limited… द्वारा हस्ताक्षर किए गए।]. विशेष बात यह है कि जय आदित्य नौटियाल एनआईटी उत्तराखण्ड के ही वर्ष 2017 बैच के पूर्व छात्र हैं [cite: जय आदित्य नौटियाल, संस्थापक एवं मुख्य रणनीतिक अधिकारी, PORAKSH Private Limited, जो एनआईटी उत्तराखण्ड के वर्ष 2017 बैच के पूर्व छात्र भी हैं…].
पूर्व छात्रों का कमाल: ‘पहाड़ी AI’ से जुड़े 10,000 से अधिक यूजर्सPORAKSH Private Limited एनआईटी उत्तराखण्ड के पूर्व छात्रों द्वारा स्थापित एक उभरता हुआ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भाषाई संरक्षण के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रहा है.उत्तराखण्ड सरकार का सहयोग: इस कंपनी ने उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से “पहाड़ी AI” का बीटा संस्करण (Beta Version) विकसित किया है ।
यह मंच मुख्य रूप से उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय लोक भाषाओं के डिजिटल संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित है।
इस अभिनव डिजिटल पहल को जनता से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और वर्तमान में इसके 10,000 से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता (Active Users) बन चुके हैं. यह सफलता साबित करती है कि कम संसाधनों वाली भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं के लिए AI आधारित समाधानों की देश में कितनी अपार संभावना है. Large Language Models (LLMs) पर मिलकर होगा कामइस उद्योग-अकादमिक (Industry-Academia) सहयोग के तहत दोनों संस्थान मिलकर भविष्य की तकनीकों पर शोध करेंगे [cite: दोनों संस्थान भारतीय भाषाओं के लिए Large Language Models (LLMs) तथा अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों के विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करने हेतु संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।]
:संयुक्त अनुसंधान एवं प्रोजेक्ट्स: दोनों पक्ष संयुक्त अनुसंधान, छात्र इंटर्नशिप और फैकल्टी-निर्देशित परियोजनाओं के माध्यम से भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन, प्रसार व डिजिटल सशक्तीकरण के लिए काम करेंगे [cite: इस सहयोग का उद्देश्य संयुक्त अनुसंधान, छात्र इंटर्नशिप, संकाय-निर्देशित परियोजनाओं तथा राष्ट्रीय स्तर की वित्तपोषण योजनाओं की संभावनाओं के माध्यम से भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति के संरक्षण, अध्ययन एवं प्रसार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित करना है।]
.LLM का विकास: भारतीय भाषाओं के लिए विशेष Large Language Models (LLMs) तथा अन्य अत्याधुनिक AI समाधान विकसित किए जाएंगे [cite: दोनों संस्थान भारतीय भाषाओं के लिए Large Language Models (LLMs) तथा अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों के विकास…].
फंडिंग और क्षमता निर्माण: राष्ट्रीय स्तर की वित्तपोषण योजनाओं (Funding Schemes) का लाभ उठाने और उभरती प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करने पर संयुक्त रूप से फोकस रहेगा।
यह दूरगामी साझेदारी एनआईटी उत्तराखण्ड के अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Research & Innovation Ecosystem) को सुदृढ़ करने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया और भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी की राष्ट्रीय पहलों को एक नई दिशा देगी [cite: यह साझेदारी एनआईटी उत्तराखण्ड के अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहलों को नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस खास अवसर पर एनआईटी उत्तराखण्ड की ओर से कुलसचिव हरि मौल आजाद, डॉ. जागृति सहारिया एवं डॉ. शशांक भातरा उपस्थित रहे [cite: इस अवसर पर एनआईटी उत्तराखण्ड की ओर से हरि मौल आजाद, कुलसचिव, डॉ. जागृति सहारिया एवं डॉ. शशांक भातरा उपस्थित रहे।]. वहीं, PORAKSH Private Limited की तरफ से कंपनी के सह-संस्थापक एवं एनआईटी के वर्ष 2017 बैच के पूर्व छात्र श्री सुमितेश नैथानी भी मौजूद रहे [cite: वहीं, PORAKSH Private Limited की ओर से कंपनी के सह-संस्थापक एवं एनआईटी उत्तराखण्ड के वर्ष 2017 बैच के पूर्व छात्र श्री सुमितेश नैथानी उपस्थित रहे।