विजय बहुगुणा
पौड़ी गढ़वाल(ब्यूरो) । आगामी गर्मी के मौसम में वनाग्नि की आशंका को देखते हुए बुधवार को जनपद में वन विभाग के गढ़वाल वन प्रभाग, सिविल एवं सोयम प्रभाग पौड़ी तथा लैंसडाउन वन प्रभाग द्वारा अलग-अलग स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारियों को परखा गया। मॉक अभ्यास के दौरान आग लगने की स्थिति में त्वरित रिस्पॉन्स, उपकरणों की उपलब्धता, विभागीय समन्वय, ग्रामीण सहभागिता, फायर टेंडर और एम्बुलेंस की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया।
गढ़वाल वन प्रभाग की एसडीओ एवं नोडल अधिकारी आयशा बिष्ट ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम के लिए बुआखाल क्षेत्र में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसके लिए स्टेजिंग एरिया बुआखाल को बनाया गया था। अभ्यास में महिला मंगल दल, वन विभाग, पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, राजस्व विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि सुबह 11:15 बजे कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि बुआखाल क्षेत्र में आबादी वाले क्षेत्र के समीप जंगल में आग फैल गई है। सूचना मिलते ही तत्काल टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद टीम ने आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन आग के फैलाव को देखते हुए अतिरिक्त बल की मांग की गई। इसके बाद महिला मंगल दल एवं एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर भेजा गया। आग का दायरा बढ़ने पर अग्निशमन वाहन की मांग की गई, जिसे तत्काल भेजा गया। वहीं आग बुझाने के दौरान दो फायर वाचर आग की चपेट में आने से घायल हो गए। स्थिति को गंभीर मानते हुए तुरंत एम्बुलेंस को घटनास्थल पर भेजा गया और घायलों को जिला अस्पताल पौड़ी लाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया। इसके बाद टीम द्वारा आबादी क्षेत्र तथा जंगल की आग को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण में कर लिया गया।
इसी क्रम में सिविल एवं सोयम प्रभाग द्वारा डांडापानी क्षेत्र में तथा लैंसडाउन वन प्रभाग द्वारा लालपानी और मटियाली में भी मॉक अभ्यास कराया गया। यहां भी आग की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई, संसाधनों की उपलब्धता, फायर लाइन, बीट स्तर पर टीम की सक्रियता और स्थानीय सहभागिता का परीक्षण किया गया।
डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम को लेकर विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। उन्होंने कहा कि जनपद में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने और त्वरित नियंत्रण के लिए विभागीय टीमों को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। मॉक ड्रिल के माध्यम से यह परखा गया कि कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद रिस्पॉन्स टाइम कितना है, उपकरण मौके तक कितनी जल्दी पहुंच रहे हैं और विभागीय समन्वय किस स्तर पर है। ग्रामीणों, महिला मंगल दल और एसडीआरएफ जैसी टीमों की सहभागिता से वनाग्नि पर नियंत्रण की क्षमता और मजबूत होगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि जंगलों के आसपास आग जलाने, बीड़ी-सिगरेट फेंकने और सूखी घास में किसी भी प्रकार की लापरवाही करने से बचें तथा आग की सूचना तत्काल वन विभाग या कंट्रोल रूम को दें।