विजय बहुगुणा
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं राजनीति विज्ञान विभाग हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधि केंद्र में एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह, मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष एवं डीन,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, प्रोफेसर ओ.पी. गुसाई, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, प्रोफेसर एम.एम. सेमवाल, विभागाध्यक्ष राजनीतिक विज्ञान विभाग मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
स्वागत भाषण में कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर एम एम सेमवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं भारत के संविधान की प्रस्तावना का वचन किया। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध कथन— “हम रहे या न रहें, यह संविधान जीवित रहेगा” — का उल्लेख करते हुए भारतीय लोकतंत्र की गहरी जड़ों की ओर संकेत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा, “भारतीय संविधान की सर्वोच्चता” विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान विश्व का सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे विस्तृत संविधान है। संविधान सभा की ऐतिहासिक यात्रा को संक्षेप में बताते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान न केवल एक दस्तावेज है, बल्कि समय के साथ निरंतर विकसित होने वाला गतिशील अभिलेख भी है।
उन्होंने उल्लेख किया कि 1949 में संविधान निर्माण के बाद 1951 में प्रथम संविधान संशोधन किया गया।
भारतीय संविधान—
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करता है, लोकतांत्रिक मूल्यों की सर्वोच्च स्थापना करता है,
और 76 वर्षों से अपने मूल आदर्शों पर दृढ़ता से कायम है।
उन्होंने कहा कि जहाँ हमारे पड़ोसी देशों में संवैधानिक संस्थाएँ कमजोर पड़ी हैं, वहीं भारत ने मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखा है। लैटिन अमेरिका एवं अफ्रीका के अनेक देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उपनिवेशवाद से मुक्ति के बाद भी कई देश स्थिर लोकतंत्र स्थापित नहीं कर सके, परंतु भारतीय संविधान ने अपनी गरिमा को निरंतर सुरक्षित रखा। मुख्य वक्ता ने निर्वाचन आयोग, राजनीतिक अपराधीकरण, वोट की राजनीति, विधिक निर्भरता एवं नागरिक उत्तरदायित्व जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने संविधान दिवस को “संविधान के प्रति निष्ठा का दिन” बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की अवधारणा भारतीय परंपरा में अत्यंत प्राचीन है, जिसके संदर्भ हमें महाभारत रामायण और अभिज्ञान शाकुंतलम् जैसे ग्रंथों में भी मिलते हैं। प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह जी ने सभी छात्र छात्राओं से आग्रह किया कि सभी को अपने अधिकारों एवं दायित्वों को समान रूप से बोध होना चाहिए।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर ओ. पी. गुसाई ने कहा कि संविधान हमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत इंडियन पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन (इप्सा) के महासचिव प्रो. संजीव कुमार शर्मा और माननीय कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह की उपस्थिति में इप्सा तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए गए, जो शैक्षणिक सहयोग एवं शोध उन्नयन की दिशा में एक अहम कदम है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. राकेश नेगी द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। तत्पश्चात सभी ने राष्ट्रगान गाकर संविधान दिवस समारोह को गरिमामय रूप से सम्पन्न किया।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं शोधार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।संचालन विदुषी डोभाल द्वारा सौंदर्यपूर्ण एवं गरिमामय रूप से किया गया।