श्रीनगर (गढ़वाल) | सत्य की गूंज ब्यूरो
हिमालयी क्षेत्र की बहुमूल्य वनस्पति संपदा को बचाने और आधुनिक तकनीक से किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से श्रीनगर में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शुक्रवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) और उद्योगिनी संस्था के संयुक्त तत्वाधान में ‘औषधीय एवं सगन्ध पादपों के संरक्षण’ विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ।
संकट में हिमालयी संपदा: डॉ. विजयकांत पुरोहित
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए हैप्रेक के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हिमालयी क्षेत्र औषधीय पौधों की दृष्टि से विश्वभर में समृद्ध है, लेकिन अंधाधुंध दोहन, प्राकृतिक आवासों के विनाश और जलवायु परिवर्तन ने कई महत्वपूर्ण प्रजातियों को विलुप्ति की कगार पर खड़ा कर दिया है। अब वैज्ञानिक अनुसंधान और जन-जागरूकता ही इनका एकमात्र बचाव है।”
खेती में तकनीक का तड़का: रिमोट सेंसिंग और क्रॉप मॉडलिंग
कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने खेती को डिजिटल युग से जोड़ने पर जोर दिया:
डॉ. अजय कुमार चौहान ने वर्चुअल माध्यम से ‘क्रॉप मॉडलिंग’ की जानकारी देते हुए बताया कि कैसे कंप्यूटर एप्लीकेशन के जरिए फसलों की वृद्धि और उत्पादन का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
स्पेश बॉन के संस्थापक डॉ. अजीत ने बताया कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग टूल के माध्यम से किसान घर बैठे अपनी फसल की स्थिति, उसकी वृद्धि और रोगों की पहचान कर सकते हैं।
स्वरोजगार और संरक्षण का संगम
उद्योगिनी के सीओ शिवम पंत ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों, विशेषकर चमोली जनपद के ब्लॉक समन्वयकों को वैज्ञानिक खेती की बारीकियों से रूबरू कराना है। इससे न केवल पौधों का संरक्षण होगा, बल्कि किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार भी खुलेंगे।
वहीँ, डॉ. विजय लक्ष्मी त्रिवेदी ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में वैज्ञानिक खेती, नर्सरी प्रबंधन और पौध प्रसार की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुदीप सेमवाल, डॉ. बबिता पाटनी, डॉ. प्रदीप डोभाल, डॉ. जयदेव चौहान, डॉ. राजीव वशिष्ठ, डॉ. मुनमुन, डॉ. नमिता, देवेश, सत्यम, अनिकेत, शिवांगी, बिपिन और मुकेश समेत कई शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।