विजय बहुगुणा
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । नगर निगम श्रीनगर की नवनिर्मित गौशाला का लोकार्पण शनिवार को भव्य समारोह के साथ संपन्न हुआ। गंगादर्शन मोड़ के समीप स्थित इस गौशाला का उद्घाटन उत्तराखंड सरकार के शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और महापौर आरती भंडारी ने किया।
इस अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापार मंडल के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। नगर निगम श्रीनगर द्वारा इस गौशाला का निर्माण दो चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में ₹321.45 लाख तथा द्वितीय चरण में ₹134.48 लाख की स्वीकृत लागत से कुल लगभग ₹4.5 करोड़ की लागत में यह परियोजना पूर्ण की गई है।
गौशाला का उद्देश्य शहर में बढ़ती निराश्रित एवं बेसहारा गायों के संरक्षण, उपचार, पोषण एवं सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह पहल आवारा पशुओं की समस्या के समाधान और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि गौशालाएं केवल पशु संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये समाज में करुणा, सेवा और संवेदनशीलता की भावना को भी सशक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देती हैं और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनती हैं।
कार्यक्रम में नगर आयुक्त नूपुर वर्मा, सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी, अधिशासी अभियंता पवन कुमार कोठियाल, व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल, नगर निगम के पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर की मातृशक्ति विशेष रूप से उपस्थित रही। अधिकारियों ने परियोजना की रूपरेखा, उद्देश्य एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
महापौर आरती भंडारी ने कहा,
“गंगा दर्शन पार्क के समीप नगर निगम श्रीनगर द्वारा निर्मित यह गौशाला शहर के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है। लगभग 4.5 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस गौशाला से शहर के निराश्रित गौवंशों को सुरक्षित आश्रय, समुचित देखभाल और उपचार की सुविधा मिलेगी। नगर निगम का संकल्प है कि गौसंरक्षण के साथ-साथ शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और संवेदनशील बनाया जाए। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं नगर निगम की पूरी टीम और शहरवासियों का आभार व्यक्त करती हूं।”
वर्तमान में 244 निराश्रित गौवंश यहां पर रह रहे हैं, नवनिर्मित गौशाला से अब यहां 500 गौवंश रह सकेंगे।
स्थानीय नागरिकों ने इस परियोजना को श्रीनगर शहर के लिए लाभकारी बताते हुए नगर निगम एवं राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की।