विजय बहुगुणा
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । श्रीनगर गढ़वाल को ध्वनि प्रदूषण से राहत दिलाने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित व अनुशासित बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने एक सराहनीय और दूरगामी पहल की है। शहर को चरणबद्ध तरीके से हॉर्न फ्री जोन एवं नो ओवरटेकिंग जोन बनाने की दिशा में शुक्रवार को नगर निगम सभागार में महापौर श्रीमती आरती भंडारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पार्षदगण, जीएमओयू व टीजीएमओयू के प्रबंधक, टैक्सी यूनियन, जय बद्री केदार टाटा सूमो यूनियन, अलकनंदा कमांडर यूनियन समिति के प्रतिनिधि एवं नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहर को शांत, व्यवस्थित और अनुशासित बनाने के इस प्रयास का समर्थन किया।
पंचपीपल से स्वीत पुल तक बनेगा हॉर्न फ्री कॉरिडोर :
बैठक में निर्णय लिया गया कि पंचपीपल से स्वीत पुल तक के क्षेत्र को प्राथमिक चरण में हॉर्न फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इस क्षेत्र में—
प्रेशर हॉर्न के प्रयोग पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
केवल आरटीओ द्वारा स्वीकृत मानक हॉर्न का ही उपयोग किया जाएगा।
अनावश्यक ओवरटेकिंग पर निगरानी रखी जाएगी।
प्रमुख स्थानों पर “हॉर्न फ्री जोन” के सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे।
क्यों जरूरी है यह पहल ? :
बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि शहर में वाहनों द्वारा प्रेशर हॉर्न का अत्यधिक व अनावश्यक प्रयोग आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। विशेष रूप से स्कूलों के आसपास पढ़ने वाले विद्यार्थियों, अस्पतालों में भर्ती मरीजों तथा वरिष्ठ नागरिकों को इससे काफी असुविधा होती है। लगातार तेज ध्वनि मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी बढ़ाती है।
नगर निगम का मानना है कि यदि यातायात अनुशासन और ध्वनि नियंत्रण पर गंभीरता से काम किया जाए तो शहर का वातावरण अधिक शांत, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बनाया जा सकता है।
मेयर ने खुद से की बदलाव की शुरुआत :
इस पहल की सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि महापौर श्रीमती आरती भंडारी ने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी में 15 दिन पहले ही हॉर्न बजाना बंद कर दिया। बताया गया कि पिछले 15 दिनों से उनकी गाड़ी में हॉर्न का प्रयोग नहीं किया गया है।
यह कदम यह संदेश देता है कि नियम केवल जनता के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी समान रूप से लागू होते हैं और बदलाव की शुरुआत नेतृत्व स्तर से होनी चाहिए।
सामूहिक सहयोग से बनेगा आदर्श शहर :
बैठक में सभी परिवहन यूनियनों और जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि वे इस अभियान को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग करेंगे। शहरवासियों से भी अपील की गई है कि वे अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचें और यातायात नियमों का पालन करें।
महापौर श्रीमती आरती भंडारी ने कहा – “श्रीनगर को शांत, सुरक्षित और अनुशासित शहर बनाना हमारा लक्ष्य है। अनावश्यक हॉर्न बजाना केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं बढ़ाता, बल्कि समाज के संवेदनशील वर्गों जैसे मरीजों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण भी बनता है।
मैंने स्वयं अपनी गाड़ी में हॉर्न बंद कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए। नगर निगम, परिवहन यूनियनों और शहरवासियों के सहयोग से हम निश्चित रूप से श्रीनगर को हॉर्न फ्री और नो ओवरटेकिंग जोन के रूप में स्थापित करेंगे।”
नगर निगम की यह पहल शहर में सकारात्मक चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि यह अभियान सफल होता है, तो श्रीनगर न केवल उत्तराखंड बल्कि अन्य नगर निकायों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकता है।