सत्य की गूंज
हरिद्वार(ब्यूरो)। विकासखंड नारसन के अंतर्गत ग्राम पंचायत पीरपुरा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के बजट में भारी सेंधमारी और अनियमितता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में तैनात एक संविदा परिचालक (कंडक्टर) को कागजों में मनरेगा मजदूर दर्शाकर सरकारी धनराशि का भुगतान कर दिया गया।
मामले की शिकायत पर हुई लोकपाल मनरेगा की कड़ाई और जांच के बाद आरोपी ने पूरी धनराशि राजकोष में वापस जमा करा दी है। वहीं, लोकपाल ने गंभीर लापरवाही बरतने पर संबंधित ग्राम रोजगार सहायक और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पर आर्थिक जुर्माना लगाया है।परिवहन विभाग में नौकरी और मनरेगा से उठाई मजदूरीप्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पीरपुरा के पांच ग्रामीणों (फिरोज, अकिल, तौकिर, राशिद और इकबाल) ने एक संयुक्त शिकायती पत्र देकर ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और अन्य के खिलाफ तालाब की मिट्टी बेचने तथा मनरेगा बजट के गबन के गंभीर आरोप लगाए थे।
शिकायत में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया था कि हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत वसीम पुत्र इदरीश को मनरेगा मजदूर दर्शाकर फर्जी तरीके से भुगतान किया जा रहा है।जांच की भनक लगते ही आरोपी ने वापस लौटाए ₹19,754मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकपाल मनरेगा बी.एस. नेगी ने 29 मई 2026 को तकनीकी विशेषज्ञ अरविंद कुमार भास्कर (अपर सहायक अभियंता लघु सिंचाई) के साथ मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन किया।जांच के दौरान जब पोल खुली, तो आरोपी संविदा परिचालक वसीम ने स्वीकार किया कि उससे त्रुटिवश मनरेगा के तहत भुगतान प्राप्त हुआ था। वसीम ने लोकपाल कार्यालय की इस कड़ी कानूनी कार्रवाई के बाद प्राप्त की गई पूरी ₹19,754 की धनराशि खंड विकास अधिकारी (BDO) नारसन के कार्यालय में पहुंचकर राजकोष में जमा करा दी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन देते हुए लिखित खेद व्यक्त किया।भले ही पैसा लौट गया लोकपाल बी.एस. नेगी ने अपने कड़े आदेश में कहा कि वसीम जिस अवधि में परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में नौकरी कर रहा था, उसी दौरान उसे मनरेगा मजदूर दर्शाना ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों के सत्यापन में की गई बेहद गंभीर लापरवाही है। भले ही पैसा वापस जमा हो गया हो, लेकिन यह मनरेगा की पारदर्शिता के नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
गलत मस्टर रोल में हाजिरी दर्ज करने और भुगतान की संस्तुति करने के लिए पीरपुरा के ग्राम रोजगार सहायक पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया है।
निगरानी न रखने और लापरवाही बरतने पर संबंधित तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पर भी ₹1,000 का जुर्माना ठोका गया है।लोकपाल कार्यालय ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) नारसन को निर्देश जारी किए हैं कि इस दंडादेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराकर इसकी विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) निर्धारित समय-सीमा के भीतर लोकपाल कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।