"गिरफ्तार होटल संचालकों के साथ कोटद्वार पुलिस टीम।"
सत्य की गूंज
कोटद्वार(ब्यूरो)। उत्तराखंड पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कोटद्वार पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस जघन्य अपराध में शामिल होटल संचालकों को साजिश रचने और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
बीती 1 अप्रैल 2026 को कोटद्वार निवासी एक व्यक्ति ने कोतवाली में अपनी 16 वर्षीय पुत्री की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 3 अप्रैल को मुख्य आरोपी विमल रावत और कृष्णा भट्ट को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
विवेचना के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि घटना के दिन आरोपियों ने एक स्थानीय होटल में शरण ली थी। होटल संचालक शुभम रावत और सोनू ने बिना किसी वैध पहचान पत्र (ID Proof) के आरोपियों को कमरा उपलब्ध कराया।
आईडी न होने के बावजूद, लालच में आकर अतिरिक्त धन लेकर अपराधियों को कमरा दिया। पुलिस के अनुसार, होटल संचालकों ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि अभियुक्तों के साथ साजिश (Conspiracy) और दुष्प्रेरण में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
कड़ी धाराओं में कार्रवाई, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमे में धारा 61(2) BNS और 16/17 पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की वृद्धि की है। आज 9 अप्रैल 2026 को दोनों संचालकों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त:
सोनू (40 वर्ष): निवासी अमरोहा, उत्तर प्रदेश (हाल निवासी- कोटद्वार)।
शुभम रावत (26 वर्ष): निवासी कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल।
पुलिस टीम की मुस्तैदी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी, सर्वेश पंवार के दिशा-निर्देशों पर गठित टीम में अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ठाकुर, क्षेत्राधिकारी निहारिका सेमवाल और प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी शामिल रहे। ग्राउंड पर वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनिल चौहान, शोएब अली और प्रीति गोसाई ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस कड़ी को जोड़ा।