चौरास परिसर में IGSI गढ़वाल चैप्टर की वार्षिक बैठक को संबोधित करते कुलाधिपति डॉ. योगेंद्र नारायण।"
विजय बहुगुणा, सत्य की गूंज
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एक्टिविटी सेंटर में आज ‘इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया’ (IGSI), गढ़वाल चैप्टर की वार्षिक बैठक का गरिमामयी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व राज्यसभा के पूर्व महासचिव डॉ. योगेंद्र नारायण उपस्थित रहे।
विरासत संरक्षण के लिए मिलेगा CSR फंड अपने संबोधन में डॉ. योगेंद्र नारायण ने समाज में सद्भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बनना चाहिए। ‘इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट’ के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
”आज हमारी राष्ट्रीय धरोहरों को मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन से दोहरा खतरा है। इनके संरक्षण के लिए सीएसआर (CSR) फंड प्रदान किया जाएगा। हमारा उद्देश्य इन धरोहरों को आय के स्रोत (Source of Income) में बदलना है, ताकि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सके।”
उन्होंने आधुनिक तकनीक के दौर में ‘सोशल वॉरियर्स’ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग से जन-कल्याणकारी कार्यों को गति देने का आह्वान भी किया यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य और स्वच्छता के मुद्दे प्रमुखता से उठे गढ़वाल चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. एम. एम. सेमवाल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं को पटल पर रखा। उन्होंने चार धाम यात्रा मार्ग पर कचरा निस्तारण (वेस्ट डंपिंग) स्थलों की पहचान।
पहाड़ों में कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रो. सेमवाल ने कहा कि ट्रस्ट का लक्ष्य पारंपरिक विरासत का दस्तावेजीकरण कर जनमानस को जागरूक करना है।
बैठक में शोधार्थियों और छात्रों ने भी महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे:
सुलक्षणा शर्मा (शोधार्थी): पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ता ऊर्जा संकट और “घोस्ट विलेज” (पलायन से खाली हुए गाँव) की समस्या पर प्रकाश डालते हुए सौर ऊर्जा को विकल्प बताया। स्नेहलता (शोधार्थी): सांकेतिक भाषा (Sign Language) के महत्व को रेखांकित किया।
एम.ए. छात्र: पहाड़ी भोजन (Pahari Food) की लुप्त होती परंपरा पर चिंता जताई। प्रो. पूजा सकलानी: प्लास्टिक प्रदूषण के उन्मूलन के लिए व्यक्तिगत प्रयासों पर जोर दिया।
कार्यक्रम में समिति की उपाध्यक्ष प्रो. सीमा धवन ने सोसायटी के उद्देश्यों की जानकारी दी, जबकि सचिव प्रो. सतीश सती ने संगठनात्मक गतिविधियों को साझा किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. पूजा सकलानी ने किया। इस अवसर पर प्रो. महेंद्र बाबू, डॉ. शेखर बहुगुणा, डॉ. वरुण बड़थ्वाल, डॉ. विजय सिंह बिष्ट, डॉ. आशीष बहुगुणा, डॉ. जसपाल चौहान, डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. गिरीश भट्ट, डॉ. अन्नू राही सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राकेश नेगी ने सभी अतिथियों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया।