विजय बहुगुणा
श्रीनगर गढ़वाल(ब्यूरो) । एनएचआरसी सदस्य प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने 27 फ़रवरी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तराखंड का दौरा किया। इस अवसर पर संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईआईसी) के सदस्य एवं मुख्य वार्डन भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रो. त्रिपाठी ने विद्यार्थियों एवं संस्थान के कर्मचारियों से संवाद करते हुए कहा कि लैंगिक समानता मानवाधिकारों का अभिन्न अंग है और तकनीकी संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षित, समावेशी और संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के पाठ्यक्रम में मानवाधिकारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा से जुड़े नैतिक एवं कानूनी पहलुओं को भी शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में एआई और साइबर तकनीक का सीधा संबंध मानवाधिकारों से है। डेटा गोपनीयता, ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध जैसे मुद्दे मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं। इसलिए तकनीकी शिक्षा के साथ मानवाधिकार मूल्यों का समन्वय आवश्यक है, ताकि भविष्य के इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ जिम्मेदार और नैतिक दृष्टिकोण अपनाएं।
उन्होंने आईआईसी समिति की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह समिति परिसर में लैंगिक संवेदनशीलता और शिकायत निवारण के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
दौरे के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान के छात्रावासों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद कर आवास, स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्य वार्डन ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों और सीमित स्थान (स्पेस) के बावजूद संस्थान प्रशासन अपनी पूर्ण क्षमता के साथ सर्वोत्तम प्रयास कर रहा है, ताकि विद्यार्थियों को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव श्री हरि मौल आज़ाद ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां शीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान प्रशासन उपलब्ध संसाधनों के भीतर विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दौरे के अंत में प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा को संस्थागत स्तर पर मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तराखंड प्रशासन के सहयोग से परिसर में मानवाधिकारों और लैंगिक समानता की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।